वृंदावन का नटखट ग्वाला;
मेरा प्यारा मुरलिवाला;
नन्ददुलारा मैया का लाडला;
आजा!!!!
तुझको निहारूं, माखन मिश्री खिलादूं ;
अपने प्रेम के बंधन में तुझको मैं बांधूं ;
झूम झूम मैं नृत्य करूं;
तेरी बंसी की धुन में रमूं ;
तू संग है मेरे तो मैं न डरूं ;
आओ आओ!!!!
सखियों बहनों;
मेंहदी रचा लो, कंगना पहन लो;
रंगों, पुष्पों से घर को सजालो;
जनमाष्टमी का उत्सव मनालो;
हर्षोल्लास से मंगल गाओ;
इस पावन दिन को खास बनालो।।।
----- शिल्पी सिन्हा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें