बुधवार, 31 जुलाई 2019

        

You are dear but don't come near.


Never had I thought you could be so special for me? Having a look keeps me smiling for the day. You have poured deep into my heart. You smile is mesmerizing and grasping. I can't hold myself back. You came in my life just when I had shed my shackles and was ready to fly. Your presence has boosted me from within. I hope to see you throughout my life. you have been so dear to me, But as we know after every dream we shall readily come out of our dreams similarly I ought to leave you. Go back to my real world. face the challenges of my life and let you live your life with someone whom you can trust, who could be with you in your hard times and keep you in priority. I hope she fulfills the emptiness of your life and stands with you always incessantly. 

बुधवार, 30 अगस्त 2017

स्वच्छाग्रह का संकल्प

स्वच्छाग्रह का संकल्प
                                                         शिल्पी सिन्हा..

स्वच्छ, निर्मल, सुन्दर, मनभावन भारत देश हमारा था,
नदियां कल-कल बहती थीं, पक्षी कलरव करते थे।।
हिमालय के आंगन में स्वच्छता का प्रसार था,
संपूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति पर करता अभिमान था।।

पर आह ! माँ के लाल ने,
उन्नति की ओर उड़ान में,
तंत्र के प्रसार में,
तकनीक के वार से,
और आलस हज़ार से,
माँ को ही बिसार दिया।।

निर्मल स्वच्छ धरा को मलिन व दूषित कर दिया।
नदियां, मृदा, आकाश, वायु सब को संदूषित कर दिया।।
अब बीमारियां हमें घेर रहीं, मृत्यू तांडव कर रही।
आबादी की अधिकता भी इसमें अपना कुछ जोड़ रही।।

सरकार ने भी अब राजनीति छोड़ स्वच्छाग्रह है छेड़ दिया।
आओ मिलकर हम भी संकल्प लें, आलस तज स्वच्छता अपनाएं।
पुरानी आदतों को बदल, विश्व स्तर पर भारत को सम्मान दिलाएं।
बच्चे, बूढ़े, युवा, महिलाएं, सब मिलकर, स्वच्छ संकल्प लें और स्वच्छ सिद्धि पाएं।।


                                                           

बुधवार, 23 अगस्त 2017

अधूरे एहसास

तुम कौन हो,
जो आते हो दिल में उतर के अपना बनाने को जिद करते हो,
तुम्हें पाना नहीं है मुझे तुम्हें खोना भी नहीं है।

तुम्हारी आंखों से खुद को देखना मुझे है,
गले लगाना नहीं है,
दूर जाना नहीं है,
पास आओ अगर तुम मुस्कुराना नहीं है ।

ख्वाब देखे है मैंने, पूरा उन्हें करना नहीं है।
जो मिली हैं खुशियां मुझे, उनसे सुकून पाना नहीं है।

तुम्हें देखना, तुम्हारी आवाज को तरसना,
यही है बस यही है सब,
अधूरे एहसास को पूरा करना नहीं है।

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

ग़म के परत


                                         ग़म के परत

आंखों से ढलते आँसू, कभी तेज़, कभी धीमी गति से गिरते हैं।
रफतार कभी ग़म  मिटा देती है, कभी फासले कम कर देती है।

पर धीमी गति से ढुलकते आँसू, मात्र पिधले ग़म बन रह जाते हैंं,
जो फिर जम कर और सख़्त बन जाते हैंं।।

कहते थे कभी कि रोके हम ग़मे नासूर निकालते हैं,
पर अब तो ग़म की बस परत चढ़ाते हैं हम।।
                                                                    -- शिल्पी सिन्हा

बुधवार, 30 दिसंबर 2015

सूखी रोटी

सूखी रोटी लेकर दौड़ते मोती के पीछे भागा पिंटू,
मानो फिसलते रेत को पकड़ने का आखिरी मौका हो.

आज तो मिल जाए निवाला जो दिनों से न पाया,
मोती की स्पीड थी बहुत तेज पर आज पिंटू बन बैठा था मिल्खा सेठ.

रोक लिया उसने मोती को जैसे मोती चोर और पिंटू सिपाही हो,
खीचा तानी, गुर्र...गुरर्र.. हट भाग की गूंज में मानो  जिन्दगी बेबस हो.

आधी रोटी मोती की आधी पिंटू ने पाया
और आज कई दिनों बाद भूख को दोनों ने पछाडा.


शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

जनमाष्टमी उत्सव के रंग कान्हा के संग!!!

वृंदावन का नटखट ग्वाला;
मेरा प्यारा मुरलिवाला;
नन्ददुलारा मैया का लाडला;

आजा!!!!
तुझको निहारूं,  माखन मिश्री खिलादूं ;
अपने प्रेम के बंधन में  तुझको मैं बांधूं ;
झूम झूम मैं नृत्य करूं;
तेरी बंसी की धुन में रमूं ;
तू संग है मेरे तो मैं न डरूं ;

आओ आओ!!!!
सखियों बहनों;
मेंहदी रचा लो, कंगना पहन लो;
रंगों, पुष्पों से घर को सजालो;
जनमाष्टमी का उत्सव मनालो;
हर्षोल्लास से मंगल गाओ;
इस पावन दिन को खास बनालो।।।

                           ----- शिल्पी सिन्हा