उमंगों के पंख
बुधवार, 31 जुलाई 2019
शुक्रवार, 7 सितंबर 2018
बुधवार, 30 अगस्त 2017
स्वच्छाग्रह का संकल्प
बुधवार, 23 अगस्त 2017
अधूरे एहसास
तुम कौन हो,
जो आते हो दिल में उतर के अपना बनाने को जिद करते हो,
तुम्हें पाना नहीं है मुझे तुम्हें खोना भी नहीं है।
तुम्हारी आंखों से खुद को देखना मुझे है,
गले लगाना नहीं है,
दूर जाना नहीं है,
पास आओ अगर तुम मुस्कुराना नहीं है ।
ख्वाब देखे है मैंने, पूरा उन्हें करना नहीं है।
जो मिली हैं खुशियां मुझे, उनसे सुकून पाना नहीं है।
तुम्हें देखना, तुम्हारी आवाज को तरसना,
यही है बस यही है सब,
अधूरे एहसास को पूरा करना नहीं है।
मंगलवार, 24 जनवरी 2017
ग़म के परत
ग़म के परत
आंखों से ढलते आँसू, कभी तेज़, कभी धीमी गति से गिरते हैं।
रफतार कभी ग़म मिटा देती है, कभी फासले कम कर देती है।
पर धीमी गति से ढुलकते आँसू, मात्र पिधले ग़म बन रह जाते हैंं,
जो फिर जम कर और सख़्त बन जाते हैंं।।
कहते थे कभी कि रोके हम ग़मे नासूर निकालते हैं,
पर अब तो ग़म की बस परत चढ़ाते हैं हम।।
-- शिल्पी सिन्हा
बुधवार, 30 दिसंबर 2015
सूखी रोटी
मानो फिसलते रेत को पकड़ने का आखिरी मौका हो.
आज तो मिल जाए निवाला जो दिनों से न पाया,
मोती की स्पीड थी बहुत तेज पर आज पिंटू बन बैठा था मिल्खा सेठ.
रोक लिया उसने मोती को जैसे मोती चोर और पिंटू सिपाही हो,
खीचा तानी, गुर्र...गुरर्र.. हट भाग की गूंज में मानो जिन्दगी बेबस हो.
आधी रोटी मोती की आधी पिंटू ने पाया
और आज कई दिनों बाद भूख को दोनों ने पछाडा.
शुक्रवार, 4 सितंबर 2015
जनमाष्टमी उत्सव के रंग कान्हा के संग!!!
वृंदावन का नटखट ग्वाला;
मेरा प्यारा मुरलिवाला;
नन्ददुलारा मैया का लाडला;
आजा!!!!
तुझको निहारूं, माखन मिश्री खिलादूं ;
अपने प्रेम के बंधन में तुझको मैं बांधूं ;
झूम झूम मैं नृत्य करूं;
तेरी बंसी की धुन में रमूं ;
तू संग है मेरे तो मैं न डरूं ;
आओ आओ!!!!
सखियों बहनों;
मेंहदी रचा लो, कंगना पहन लो;
रंगों, पुष्पों से घर को सजालो;
जनमाष्टमी का उत्सव मनालो;
हर्षोल्लास से मंगल गाओ;
इस पावन दिन को खास बनालो।।।
----- शिल्पी सिन्हा