बुधवार, 30 दिसंबर 2015

सूखी रोटी

सूखी रोटी लेकर दौड़ते मोती के पीछे भागा पिंटू,
मानो फिसलते रेत को पकड़ने का आखिरी मौका हो.

आज तो मिल जाए निवाला जो दिनों से न पाया,
मोती की स्पीड थी बहुत तेज पर आज पिंटू बन बैठा था मिल्खा सेठ.

रोक लिया उसने मोती को जैसे मोती चोर और पिंटू सिपाही हो,
खीचा तानी, गुर्र...गुरर्र.. हट भाग की गूंज में मानो  जिन्दगी बेबस हो.

आधी रोटी मोती की आधी पिंटू ने पाया
और आज कई दिनों बाद भूख को दोनों ने पछाडा.