सूखी रोटी लेकर दौड़ते मोती के पीछे भागा पिंटू,
मानो फिसलते रेत को पकड़ने का आखिरी मौका हो.
आज तो मिल जाए निवाला जो दिनों से न पाया,
मोती की स्पीड थी बहुत तेज पर आज पिंटू बन बैठा था मिल्खा सेठ.
रोक लिया उसने मोती को जैसे मोती चोर और पिंटू सिपाही हो,
खीचा तानी, गुर्र...गुरर्र.. हट भाग की गूंज में मानो जिन्दगी बेबस हो.
आधी रोटी मोती की आधी पिंटू ने पाया
और आज कई दिनों बाद भूख को दोनों ने पछाडा.
मानो फिसलते रेत को पकड़ने का आखिरी मौका हो.
आज तो मिल जाए निवाला जो दिनों से न पाया,
मोती की स्पीड थी बहुत तेज पर आज पिंटू बन बैठा था मिल्खा सेठ.
रोक लिया उसने मोती को जैसे मोती चोर और पिंटू सिपाही हो,
खीचा तानी, गुर्र...गुरर्र.. हट भाग की गूंज में मानो जिन्दगी बेबस हो.
आधी रोटी मोती की आधी पिंटू ने पाया
और आज कई दिनों बाद भूख को दोनों ने पछाडा.
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