तुम्हारी चाहत
तुम्हें पाकर समझी कि दीवानगी कि राह पर कितना नशा है।
तुम धड़कन और मैं उसके धुन पर थिरकती नृत्यांगना हूँ।।
मेरी चाहतें जिनसे मैं बेखबर थीं।
तूने उन्हें साकार कर मुझे ज़िंदा किया।।
कभी जो राह भटकी मैं।
तूने नईं मंजिंलों का पता दिया।।
---शिल्पी सिन्हा