‘’मैं’’
शिल्पी सिन्हा
मुझे
‘’मैं’’ बनना है,
किसी
की तस्वीर नहीं,
किसी
की पहचान नहीं,
मुझे अपनी राह चुनना है।
क्यों मैं इनकी, उनकी सबकी राह पर चलूँ,
क्यों
मैं आसमान में किसी के पदचिन्हों पर चलूँ,
मैं
आजाद गगन की पंछी हूँ,
मुझे
नए आयाम पाने दो।
ठोकरें
भी मेरी हों,
राह
भी मेरी हों,
मंजिल मिले तो मेरी,
और
हार हो तो मेरी हो।
मेरी
इच्छा से मैं सबको सुनूँ,
मेरी
रूचि से मैं उनको चुनूँ,
किसी
का सहारा लेकर नहीं,
खुद सहारा बन मैं मंजिल पर पहुँचूँ।
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