स्वच्छाग्रह का
संकल्प
शिल्पी सिन्हा..
स्वच्छ, निर्मल, सुन्दर, मनभावन भारत देश हमारा था,
नदियां कल-कल बहती थीं, पक्षी कलरव करते थे।।
हिमालय के आंगन में स्वच्छता का प्रसार था,
संपूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति पर करता अभिमान था।।
पर आह ! माँ के लाल ने,
उन्नति की ओर उड़ान में,
तंत्र के प्रसार में,
तकनीक के वार से,
और आलस हज़ार से,
माँ को ही बिसार दिया।।
निर्मल स्वच्छ धरा को मलिन व दूषित कर दिया।
नदियां, मृदा, आकाश, वायु सब को संदूषित कर दिया।।
अब बीमारियां हमें घेर रहीं, मृत्यू तांडव कर रही।
आबादी की अधिकता भी इसमें अपना कुछ जोड़ रही।।
सरकार ने भी अब राजनीति छोड़ स्वच्छाग्रह है छेड़ दिया।
आओ मिलकर हम भी संकल्प लें, आलस तज स्वच्छता अपनाएं।
पुरानी आदतों को बदल, विश्व स्तर पर भारत को सम्मान दिलाएं।
बच्चे, बूढ़े, युवा, महिलाएं, सब मिलकर, स्वच्छ संकल्प लें और स्वच्छ
सिद्धि पाएं।।
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