बुधवार, 23 अगस्त 2017

अधूरे एहसास

तुम कौन हो,
जो आते हो दिल में उतर के अपना बनाने को जिद करते हो,
तुम्हें पाना नहीं है मुझे तुम्हें खोना भी नहीं है।

तुम्हारी आंखों से खुद को देखना मुझे है,
गले लगाना नहीं है,
दूर जाना नहीं है,
पास आओ अगर तुम मुस्कुराना नहीं है ।

ख्वाब देखे है मैंने, पूरा उन्हें करना नहीं है।
जो मिली हैं खुशियां मुझे, उनसे सुकून पाना नहीं है।

तुम्हें देखना, तुम्हारी आवाज को तरसना,
यही है बस यही है सब,
अधूरे एहसास को पूरा करना नहीं है।

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